सोरायसिस – सोरायसिस क्या है? आयुर्वेदिक उपचार

what is psoriasis
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Dr. Arati Soman
Ayurvedic Physician & Head Formulator at Nisagra Herbs

हाल के वर्षों में भारत में सोरायसिस के मामलों में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है। The Hindu में प्रकाशित एक स्वास्थ्य रिपोर्ट के अनुसार, त्वचा रोग विशेषज्ञ मानते हैं कि बदलती जीवनशैली, बढ़ता मानसिक तनाव, प्रदूषण और अनियमित खान-पान इसके प्रमुख कारण बन रहे हैं।

सोरायसिस (Psoriasis) एक पुरानी, गैर-संक्रामक और सूजनकारी त्वचा रोग है, जिसमें त्वचा पर लाल, सूजे हुए चकत्ते बनते हैं और उन पर सफेद या चांदी जैसे पपड़ीदार स्केल्स दिखाई देते हैं।

यह रोग अक्सर सिर की त्वचा (स्कैल्प), कोहनी, घुटनों, कमर, हथेलियों, तलवों और नाखूनों को प्रभावित करता है।

आधुनिक चिकित्सा विज्ञान इसे एक ऑटोइम्यून विकार मानता है, जिसमें प्रतिरक्षा प्रणाली त्वचा की कोशिकाओं को सामान्य से कई गुना तेजी से बनने के लिए प्रेरित कर देती है। परिणामस्वरूप, त्वचा की ऊपरी परत बार-बार झड़ने लगती है और सूजन, खुजली व जलन बनी रहती है।

आयुर्वेद में सोरायसिस को “किटिभ कुष्ठ” और “एक कुष्ठ” के अंतर्गत वर्णित किया गया है, जो मुख्यतः वात और कफ दोष के असंतुलन से उत्पन्न होते हैं और रक्त, मांस, त्वचा व लसिका धातु को प्रभावित करते हैं।

इस प्रकार, सोरायसिस केवल एक त्वचा की समस्या नहीं है, बल्कि यह शरीर, मन और जीवनशैली से जुड़ा हुआ दीर्घकालीन रोग है, जिसे समझने और प्रबंधित करने के लिए समग्र दृष्टिकोण आवश्यक है।

सोरायसिस के कारण (आयुर्वेद अनुसार) - Causes of Psoriasis (according to Ayurveda)

  • आहारजन्य कारण: भारी, तैलीय, खट्टे, मसालेदार भोजन, दही, मछली, मांस, गुड़।
  • विहारजन्य कारण: दिन में सोना, अत्यधिक श्रम, अनियमित जीवनशैली, तेज धूप।
  • मानसिक कारण: तनाव, चिंता, शोक।
  • आनुवंशिक कारण: परिवार में त्वचा रोग की प्रवृत्ति होना।

सोरायसिस के लक्षण (Symptoms of Psoriasis)

  • लाल, सूजे हुए धब्बे
  • चांदी जैसे स्केल्स या पपड़ी
  • लगातार खुजली और जलन
  • फटी हुई या खून निकलने वाली त्वचा
  • नाखूनों का मोटा होना या टूटना
  • जोड़ों में दर्द (Psoriatic Arthritis)

सोरायसिस का आयुर्वेदिक उपचार

1. शोधन चिकित्सा (Detox Therapies)

  • विरेचन: पित्त और कफ दोष को बाहर निकालना।
  • वमन: कफ दोष की शुद्धि।
  • रक्तमोक्षण: रक्त का शोधन।
  • स्नेहपान व स्वेदन: घृत सेवन व पसीना लाने की क्रिया।

2. शमन चिकित्सा (Palliative Therapies)

  • पंचतिक्त घृत: रक्त शुद्धि और खुजली में लाभकारी।
  • कुमारभारणा रस: प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला योग।
  • औषधीय तेल: जैसे मरिचादि तेल – त्वचा पर लगाने से लाभ।

3. जड़ी-बूटियाँ (Herbal Remedies)

  • नीम: रक्त शुद्धिकरण में सहायक।
  • हल्दी: सूजन व संक्रमण विरोधी।
  • मंजिष्ठा: त्वचा रोग नाशक।
  • त्रिफला: पाचन और डिटॉक्स के लिए।
  • गुडूची: रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाती है।

4. पथ्य (Diet & Lifestyle)

  • हल्का, सुपाच्य भोजन – जौ, पुराना चावल, हरी सब्जियाँ।
  • दही, मछली, मांस, शराब, तैलीय भोजन से परहेज।
  • योग, प्राणायाम और ध्यान से तनाव में राहत।
  • ऋतुचर्या व दिनचर्या का पालन करें।

निष्कर्ष

सोरायसिस एक दीर्घकालीन रोग है जो बार-बार उभर सकता है। आधुनिक चिकित्सा लक्षणों को दबाती है, जबकि आयुर्वेद जड़ से कारणों को दूर करने और शरीर के दोषों को संतुलित करने पर केंद्रित है। पंचकर्म, हर्बल औषधियाँ और उचित आहार-विहार से लंबे समय तक लाभ संभव है।

✅ Nisarga Herbs आपके लिए परंपरागत आयुर्वेदिक हर्बल उत्पाद प्रदान करता है जो त्वचा रोगों के लिए सुरक्षित और प्रभावी हैं।

References
  1. Journal of Ayurvedic and Herbal Medicine. Welcome to Journal of Ayurvedic and Herbal Medicine (J Ayu Herb Med 2454‑5023). [PDF] Available at: https://www.ayurvedjournal.com/WelcomeJAHM.pdf
  2. PMC. Article: PMC8039350. Available at: https://pmc.ncbi.nlm.nih.gov/articles/PMC8039350/

FAQ

प्रश्न: क्या आयुर्वेद सोरायसिस को पूरी तरह ठीक कर सकता है?

उत्तर: हाँ, आयुर्वेद रोग की जड़ पर काम करता है। नियमित और अनुशासित उपचार से लंबे समय तक आराम मिलता है और शुरुआती अवस्था में पूर्ण उपचार भी संभव है।

प्रश्न: क्या सिर की सोरायसिस (स्कैल्प सोरायसिस) आयुर्वेद से ठीक हो सकती है?

उत्तर: हाँ, विशेष औषधीय तेल और लेप (हर्बल पैक) स्कैल्प सोरायसिस में लाभकारी हैं। शिरोधारा जैसी पंचकर्म चिकित्सा भी असरदार हो सकती है।

प्रश्न: क्या सोरायसिस में आहार सचमुच मदद करता है?

उत्तर: बिल्कुल। आयुर्वेद और आधुनिक शोध दोनों यह मानते हैं कि असंगत भोजन से बचकर और सात्त्विक आहार अपनाकर सोरायसिस की समस्या को कम किया जा सकता है।

प्रश्न: क्या मैं निसर्गा हर्ब्स के उत्पाद आधुनिक दवाइयों के साथ ले सकता हूँ?

उत्तर: हाँ, निसर्गा के हर्बल उत्पाद कोमल और सुरक्षित हैं। इन्हें आधुनिक दवाओं के साथ लिया जा सकता है। फिर भी, व्यक्तिगत सलाह के लिए आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है।


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